पहल संवाद
रांची डेस्क: हार्मूज जलडमरूमध्य को खुलाने के प्रयासों को चीन और रूस के वीटो के कारण बड़ा झटका लगा है. चीन और वीटो के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से जुड़ा अहम प्रस्ताव यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में पारित नहीं हो सका. यूएन में प्रस्ताव बहरीन की ओर से पेश किया गया था, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल हो सके. मगर रूस और चीन ने वीटो के कारण यह पहल विफल हो गई. प्रस्ताव के विफल हो जाने के कारण खाड़ी केतेल उत्पादक देशों को बड़ा झटका लगा है. प्रस्ताव विफल होने के बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नाराजगी जताई है.
बहरीन द्वारा जो प्रस्ताव लाया गया था उसमें किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का उल्लेख नहीं था, इस प्रस्ताव का उद्देश्य केवल इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलना था. लेकिन चीन और रूस ने अपने स्वार्थों के कारण उस प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया.
प्रस्ताव पारित नहीं होने के पीछे एक वजह यह भी है कि सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी. पिछले दो हफ्तों में इसे करीब छह बार संशोधित किया गया, क्योंकि कई देशों ने इसके विभिन्न प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी. अंत में हुआ भी वही कि इस पर अंतिम रूप से पर्याप्त सहमति नहीं बन पायी
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यूएई ने कहा कि परिषद इस गंभीर वैश्विक मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय लेने में विफल रही है. यूएई ने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए और किसी भी देश को इसे बाधित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए.
यूएई ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा और समाधान के लिए प्रयास जारी रखेगा.
उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव के विफल होने से न केवल क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को झटका लगा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी अनिश्चितता बढ़ गई है.

