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महाभियोग से पहले जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को सौंपा इस्तीफा, कैश कांड में नाम आने के बाद आहत होकर लिया फैसला

पहल संवाद

रांची/डेस्क: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने हैरानी भरा निर्णय लेते हुए इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया है. खबर आ रही है कि उन्होंने इस्तीफा 9 अप्रैल को राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू को भेजा था. बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा 2031 में रिटायर होने वाले थे.

जस्टिस यशवंत वर्मा मार्च 2025 में उस समय चर्चा में आये थे जब Delhi High Court में तैनाती के दौरान उनके सरकारी आवास में आग लग गई थी. उसके बाद जले हुए अवशेषों से बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने की खबर आई थी. जस्टिस वर्मा अपने ऊपर लगे आरोपों को शुरू से नकारते रहे. उनका कहना था कि जहां जली हुई नकदी पायी गयी है, वह उनके रहने वाली जगह का हिस्सा नहीं है. और जो पैसा बरामद किया गया है, उससे उनका कोई सम्बंध नहीं है.

बता दें कि अब जब उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है तो उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह भी लिखी है. इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वे कारणों का विस्तार नहीं करना चाहते, लेकिन “गहरी पीड़ा” के साथ वह अपना पद छोड़ रहे हैं.

जस्टिस यशवंत वर्मा के कथित मामले को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया था. भारत के मुख्य न्यायाधीश Sanjiv Khanna ने 2 मार्च 2025 को तीन जजों की एक आंतरिक जांच समिति बनाई थी. इस समिति ने मई 2025 में अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें कहा गया कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोप विश्वसनीय हैं. इस पूरे मामले में एक अभूतपूर्व कदम भी उठाया गया.

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