पहल संवाद
रांची/डेस्क: महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं करा कर केन्द्र की मोदी सरकार इतिहास रचने से चूक गयी. हालांकि इसका अंदेशा पहले से ही था. संशेधन विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 सांसदों ने वोट पड़े, जबकि विधेयक को पास कराने के लिए दो तिहाई वोटों की जरूरत थी. महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित नहीं होने के कारण सरकार ने बाकी 2 और विधेयकों को भी वापस ले लिया. विधेयकों पर विशेष सत्र के दो दिन करीब 13 घंटे और चर्चा हुई.
लोकसभा में देर शाम तक चर्चा के बाद संविधान संशोधन होने के कारण आवश्यक मत विभाजन हुआ। इसमें विधेयक के पक्ष में 298 और विधेयक के विरोध में 230 मत पड़े। विधेयक पारित नहीं होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने शेष दो विधेयकों को वापस लेने की घोषणा करने के साथ यह भी कहा कि सरकार ने अभी केवल एक मौका गंवाया है और महिलाओं को अधिकार दिलाने का सरकार का अभियान जारी रहेगा.
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर सभी पार्टियों से विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी. लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने अंतरआत्मा की आवाज सुनकर वोट करने की अपील की थी.
और 54 वोटों का जुगाड़ नहीं कर सकी सरकार
131वां संविधान संशोधन विधेयक पर कुल 528 सांसदों ने मतदान किया चूंकि ये संविधान संशोधन विधेयक था, इसलिए सदन में उपस्थित और कुल मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई वोट जरूरी थे. उपस्थिति के हिसाब से विधेयक को पारित होने के लिए 352 वोट चाहिए थे, जो नहीं मिले. सरकार 54 वोटों की कमी से अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी.

