पहल संवाद
रांची डेस्क: केन्द्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा करने और उसे पारित कराने के लिए तीन दिनों का विशेष संसद सत्र आहूत किया है. संसद के विशेष सत्र की कार्यवाही 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक चलेगी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विशेष सत्र की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू की ओर से अनुरोध प्राप्त हुआ है. उसके अनुसार सरकारी कार्य से 16 अप्रैल को फिर बैठेंगे. वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करते हुए उपसभापति हरिवंश ने कहा कि सदन की कार्यवाही 16 अप्रैल तक के लिए स्थगित की जाती है.
संसद के विशेष सत्र के आहूत किये जाने से यह बात स्पष्ट हो गयी है इस सत्र में सरकार का पूरा फोकस ‘महिला आरक्षण कानून’ को जल्द से जल्द पारित उतारने पर हो सकता है.
लोकसभा सीटें बढ़कर हो जायेंगी 816
2023 में संसद से जब नारी वंदन अधिनियम पारित हुआ था तब उसमें महिलाओं के लिए लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गयी थी. लेकिन समाप्त हुए संसद के वर्तमान सत्र में केन्द्र सरकार ने नारी वंदन संशोधन अधिनियम सदन में पेश किया है. इससे लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी है. यानी की सीटों की कुल संख्या 50.3 प्रतिशत बढ़ जायेगी. इसके बाद इनमें से 33 प्रतिशत सीटें यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. महिलाओं की 273 सीटें आरक्षित किये जाने के बाद पहले की तरह सामान्य 543 सीटें शेष रह जायेंगी. इन सीटों पर भी महिलाएं खड़ी हो सकती है. लेकिन 273 सीटों पर सिर्फ महिलाएं ही चुनाव लड़ेंगी. केन्द्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों में ओबीसी का कोई कोटा नहीं होगा.
कांग्रेस के जयराम रमेश ने जताई आपत्ति
संसद के विशेष सत्र की घोषणा होने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस पर आपत्ति जतायी है. उन्होंने कहा कि जब देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव आसन्न है, ऐसे में विशेष सत्र आहूत करने की क्यों आवश्यकताआन पड़ी है. वर्ष 2023 में संसद ने जब महिला आरक्षण बिल को पास किया था उसी समय विपक्ष ने इसे लागू करने की मांग की थी लेकिन केन्द्र सरकार ने देश में अगली जनगणना और परिसीमन का बहाना बनाकर इसे टाल दिया.

