Thursday, March 19, 2026
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सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बनाने की योजना से 95 स्कूल प्रभावित, अधर में 11,000 से अधिक छात्रों का भविष्य

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी (वन्य जीव अभ्यारण्य) घोषित करने की योजना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रस्तावित परियोजना से क्षेत्र के 95 स्कूलों पर असर पड़ने की आशंका है, जहां लगभग 11,234 छात्र अध्ययनरत हैं।

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित 576 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आने वाले मनोहरपुर और नोवामुंडी प्रखंडों के करीब 56 गांव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।


📌 प्रभावित स्कूलों की संख्या:

श्रेणी संख्या
प्लस टू उच्च विद्यालय 5
उच्च विद्यालय 3
मध्य विद्यालय 30
प्राथमिक और उत्क्रमित विद्यालय 57
कुल स्कूल 95
कुल छात्र 11,234
बालक 5,712
बालिका 5,522

🧒 ग्रामीणों की चिंता: शिक्षा और भविष्य संकट में

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने सरकार की इस योजना का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि अगर यह क्षेत्र वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित होता है, तो बच्चों की शिक्षा व्यवस्था बाधित होगी और भविष्य अंधकारमय हो सकता है।


🏛️ सरकारी प्रक्रिया: मंत्रियों की टीम पहुंची, रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं

सुप्रीम कोर्ट द्वारा झारखंड सरकार को 8 अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिए जाने के बाद राज्य सरकार ने मंत्रियों के एक समूह को सारंडा भेजा था, ताकि ग्रामीणों से राय-मशविरा किया जा सके। हालांकि, मंत्रियों ने ग्रामीणों की राय को सार्वजनिक नहीं किया और रांची लौट गए।

इस बीच, कई गांवों में हुई आमसभाओं में ग्रामीणों ने वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया।


📋 क्या कहती है सरकार?

प्रशासन का कहना है कि स्कूलों की पूरी सूची राज्य सरकार को भेज दी गई है, और आगे की कार्रवाई सरकारी आदेश के अनुसार की जाएगी। वहीं, सरकार अब ग्रामीणों की राय को ध्यान में रखते हुए अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में जुट गई है।


🔍 सार: विकास बनाम जनहित

सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करना एक पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अहम फैसला हो सकता है, लेकिन इसका स्थानीय समुदाय, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक ढांचे पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें सरकार की अंतिम रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

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