पहल संवाद
रांची/डेस्क: गलवान की हिंसक झड़क के बाद चीनी के साथ रिश्तों में आई खटास अब कम होने लगी है. अमेरिका और ईरान के युद्ध से बदले वैश्किक हालात में अब नये ध्रुव बनने लगे है. चीन अब भारत के लिए अछूत नहीं रहा, बल्कि अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत हुए है. भारत में चीनी राजदूत जू फिहोंग ने इसबात की पुष्टि की है. फिहोंग ने बताया कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच चीन अमेरिका को बहुत पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना है. चीनी राजदूत का यह बयान भारत-चीन के बदलते व्यापारिक रिश्तों की कहानी तो कह ही रही है, यह खबर अमेरिका के लिए किसी झटके से कम नहीं है.
भारत और चीन के बीच कितना हुआ व्यापार
चीनी राजदूत भारत-चीन के बीच व्यापार का एक आंकड़ा भी प्रस्तुत किया है. फिहोंग ने एक्स पर जो आंकड़ा दिया है, उसके अनुसार, पिछले 11 महीने अमेरिका ने भारत के साथ 127.8 बिलियन डॉलर (लगभग 11.82 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार किया है, जबकि चीन ने इसी दौरान 138 बिलियन डॉलर (करीब 12.80 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार किया है. यानी चीन भारत के साथ व्यापार के मामले में लगभग 10 बिलियन डॉलर की बढ़त बनाए हुए है.
चीन से आयात ज्यादा, भारत से निर्यात काफी कम
हालांकि भारत से आयात-निर्यात के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अन्तर है. वर्ष 2025 में भारत ने चीन को 19.75 बिलियन डॉलर (करीब 1.82 लाख करोड़ रुपये) का निर्यात किया, जबकि चीन ने भारत को 135.87 बिलियन डॉलर (12.5 लाख करोड़ रुपये) का निर्यात किया है. ऐसे में भारत का व्यापार घाटा 116.12 बिलियन डॉलर (10.68 लाख करोड़ रुपये) बढ़ा है. बता दें कि चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री से आदि का आयात ज्यादा है, जबकि भारत कच्चे माल का निर्यात करता है. ऐसे में उसका व्यापार घाटा बढ़ा है.
एफडीआई के जरिए व्यापार घाटा करने का प्रयास
फोर्ब्स के मुताबिक, भारत अपना व्यापार घाटा कम करने का प्रयास कर रहा है. इसके लिए उसने 6 साल बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति (FDI) में संशोधन किया है. संशोधन से चीन समेत भारत के पड़ोसी देशों की 10 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी वाली कंपनियों को अब सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं. उनका निवेश स्वाचालित रूट से हो जाएगा. इससे भारत को व्यापार घाटे को कम करने, तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने और अधिक FDI आकर्षित करने में मदद मिलेगी. बता दें कि गलवान घाटी विवाद के बाद भारत ने चीन से व्यापार नियमों को सख्त करलिया था. साथ ही इसका असर कोविड-19 के दौरान भी देखने को मिला था. इस सख्ती के बाद चीन का निवेश लगभग रुक गया. अब नियम संशोधन से चीनी निवेश के दरवाजे खुल गए हैं.

