पहल संवाद
रांची डेस्क: मंगलवार को तीन राज्यों, असम, पुडुचेरी और केरल के चुनाव प्रचार का शोर समाप्त हो जायेगा उसके बाद 9 अप्रैल को चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जायेगी. हालांकि इन तीनों राज्यों के चुनाव का परिणाम क्या होगा, इसके लिए लम्बा इन्तजार करने होगा, क्योंकि इन तीनों राज्यों के चुनाव का परिणाम शेष दो राज्यों, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव समाप्त होने के बाद 4 मई को घोषित होगा.
यानी इतने लम्बे समय तक राजनीति में रुचि रखने वाले लोगों को इन्तजार करना होगा? हम आपको चुनाव परिणाम के बारे में तो कुछ नहीं बता सकते लेकिन हां, एक ओपिनियन पोल सामने आया जो आपकी जिज्ञासा थोड़ी शांत कर सकता है केरल में चुनाव परिणाम क्या हो सकता है, उसमें किसका पलड़ा भारी रहेगा और सत्ता के नजदीक पहुंच रहा है. क्योंकि ओपिनियन पोल ने LDF- UDF दोनों के पक्ष में 50-50 सम्भावना जतायी है. CNN-News18 पर ‘वोट वाइब’ का एक ताजा सर्वे जारी हुआ है, उसके अनुसार, सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन (LDF) और विपक्षी कांग्रेस नीत गठबंधन (UDF) के बीच कांटे की टक्कर है. ओपिनियन पोल के अनुसार, केरल की जनता न तो सत्ताधारी गठबंधन को और नहीं विपक्षी गठबंधन को सत्ता की कुंजी दे रहे हैं. क्योंकि दोनों की हार-जीत का अंतर महज 1 प्रतिशत के वोट शेयर पर टिका हुआ है.
क्या है ओपिनियन पोल की राय?
- केरल विधानसभा में कुल सीटें – 140
- बहुमत का जादुई आंकड़ा – 71
- सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) को अनुमानित सीटें – 63 से 73
- विपक्षी यूडीएफ (UDF) को अनुमानित सीटें – 64 से 74
- बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को अनुमानित सीटें – 1 से 5
- सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) को 63 से 73 सीटें मिल सकती हैं.
- LDF को वोट मिलने का अनुमान – 38.7 प्रतिशत
- UDF को वोट मिलने का अनुमान – 39.7 प्रतिशत
यानी सीटों और वोट शेयरिंग में दोनों गठबंधनों के बीच मामूली अंतर है जो यह बताने में पूरी तरह से असमर्थ है कि केरल में ‘सत्ता विरोधी लहर’ चल रही है या फिर ‘वापसी की उम्मीद’ है. उतना ही नहीं, मुख्यमंत्री पद की पसंद के मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अभी भी 31.3 प्रतिशत लोग पसंद कर रहे हैं. जबकि यूडीएफ के वी.डी. सतीशन 29.5 प्रतिशत लोगों की पसंद हैं. फिर सरकार के रिपोर्ट कार्ड में 40 प्रतिशत लोग सरकार के प्रदर्शन को ‘अच्छा’ मान रहे हैं, जबकि 43 प्रतिशत लोगों ने इसे ‘खराब’ बताया है. यही बात हो जो पिनाराई विजयन के खिलाफ जा रहा है. सर्वे में यह भी सामने आया है कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद के कई चेहरों का होना उसके लिए नुकसान देह हो सकता है. अब देखना यह होगा कि 4 मई को जब चुनाव परिणाम आते हैं तो केरल की जनता ‘ऊंट को किस करवट’ बैठाती है.

