Thursday, March 19, 2026
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झारखंड में पेसा नियमावली पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला टला: बालू घाटों पर रोक जारी

Ranchi : पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम-1996 के तहत पेसा नियमावली बनाने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में हुई. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने बालू घाटों व लघु खनिजों के आवंटन पर लगायी गयी रोक (अंतरिम आदेश) को हटाने संबंधी राज्य सरकार के आग्रह को फिलहाल नहीं माना है. कोर्ट ने इस रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखी है. इससे पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन की ओर से कोर्ट से समय देने का आग्रह करते हुए कहा गया कि पेसा नियमावली को लेकर 17 विभागों से मंतव्य मांगा गया था. 5 विभाग से अभी भी मंतव्य नहीं मिला है. मंतव्य मिलने के बाद नियमावली को कैबिनेट में भेजा जाएगा. कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही नियमावली लागू कर दी जायेगी. महाधिवक्ता ने कोर्ट से समय देने का आग्रह किया। जिस पर कोर्ट सुनवाई की तिथि 30 अक्टूबर निर्धारित की. मामले की सुनवाई के दौरान पंचायतीराज विभाग के सचिव मनोज कुमार सशरीर उपस्थित थे. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक राय ने पक्ष रखा.

जानिए क्या है मामला
वर्ष 1996 में केंद्र सरकार ने पेसा कानून लागू किया था. इसका उद्देश्य राज्य के शिड्यूल एरिया में आदिवासियों के हितों की सुरक्षा करना था, लेकिन एकीकृत बिहार तथा झारखंड गठन से लेकर अब तक राज्य सरकार द्वारा कानून के तहत नियमावली नहीं बनायी गयी है. वर्ष 2019 तथा 2023 में नियमावली का ड्रॉफ्ट तैयार किया गया था, लेकिन लागू नहीं किया गया. जब लागू नहीं किया गया, तो हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी. 29 जुलाई 2024 को हाइकोर्ट ने जनहित याचिका में आदेश पारित कर राज्य सरकार को दो माह में पेसा नियमावली लागू करने का आदेश दिया था.

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