Thursday, March 19, 2026
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झारखंड में कभी प्रभावशाली रहे IAS विनय चौबे पर भ्रष्टाचार के मामलों की बढ़ती परतें, एसीबी कर रही गहन जांच


झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में एक समय में ताकतवर माने जाने वाले IAS विनय चौबे अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में चौबे की पूर्व की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब तक उन पर तीन प्रमुख मामलों में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है।

1. सरकारी वन भूमि का अवैध हस्तांतरण

हजारीबाग जिले की एक गैर मजरुआ खास जंगल प्रकृति की भूमि, जिसे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार संरक्षित माना गया था, उसे अवैध रूप से निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त (DC) के पद पर थे।

ACB की जांच में पाया गया कि इस ज़मीन के अवैध दाखिल-खारिज में नेक्सजेन ऑटोमोबाइल के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी को लाभ पहुंचाया गया। विनय सिंह को गिरफ्तार किया गया है और इस प्रकरण में विनय चौबे के खिलाफ एक नई FIR दर्ज की गई है।


2. ट्रस्ट की ज़मीन को सरकारी बताकर निजी लोगों को बांटना

एक अन्य मामले में हजारीबाग की 2.75 एकड़ खासमहल भूमि, जिसे 1948 में एक ट्रस्ट को लीज पर दिया गया था, को प्रशासनिक षड्यंत्र के तहत सरकारी भूमि घोषित कर दिया गया।

आरोप है कि लीज नवीनीकरण के आवेदन से ‘सेवायत’ शब्द को हटवाकर, इस ज़मीन को 23 निजी व्यक्तियों को अवैध रूप से आवंटित किया गया। इस प्रक्रिया में तत्कालीन डीसी विनय चौबे की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और उनके विरुद्ध एक और मामला दर्ज किया गया है।


3. शराब घोटाला: सरकारी खजाने को ₹38 करोड़ का नुकसान

विनय चौबे का नाम राज्य में हुए शराब घोटाले में भी सामने आया है। ACB के अनुसार, शराब एजेंसियों और प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में नियमों की अनदेखी कर उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया।

इससे राज्य सरकार को लगभग ₹38 करोड़ का नुकसान हुआ। इसी मामले में उन्हें 20 मई को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि अब वे जमानत पर बाहर हैं।


जांच का दायरा हुआ और व्यापक

ACB की कार्रवाई अब केवल विनय चौबे तक सीमित नहीं रह गई है। उनसे जुड़े अन्य अधिकारियों व लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जाँच में मिले तथ्यों के आधार पर, भविष्य में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।


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