Thursday, March 19, 2026
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53rd Chief Justice of India : जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे

53rd Chief Justice of India : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को देश का 53वां मुख्य न्यायाधीश (CJI) नियुक्त किया गया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक वे 24 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे और 9 फरवरी, 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे। कानून मंत्रालय ने गुरुवार को उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके स्थान पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

यह शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि पहली बार इतने बड़े स्तर पर विदेशी न्यायिक प्रतिनिधिमंडल इसमें शामिल होगा।

रिपोर्ट के अनुसार इस कार्यक्रम में छह देशों से आए एक दर्जन से अधिक न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश शिरकत करेंगे. इनमें भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट जज और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे. इससे पहले वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कार्यरत थे. शपथ ग्रहण समारोह में उनके परिवार के अलावा हरियाणा के हिसार बार एसोसिएशन के 136 वकीलों को भी आमंत्रण भेजा गया है.

हरियाणा में जन्में हैं जस्टिस सूर्यकांत 

हरियाणा के हिसार जिले में 10 फरवरी, 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्यकांत ने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंच बनाई है. उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से LLM में फर्स्ट क्लास फर्स्ट रैंक हासिल की. पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में उल्लेखनीय फैसलों के बाद वे अक्टूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में पदोन्नत हुए.

बिहार में 65 लाख हटाए गए वोटरों का ब्यौरा सार्वजनिक करने कहा था 

जब बिहार में मतदाता सूची संशोधन चल रहा था और 65 लाख हटाए गए वोटरों  के नाम हटाये गये थे, तो जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से 65 लाख हटाए गए वोटरों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने को कहा. इसके साथ ही एक महिला सरपंच को अवैध रूप से हटाए जाने के मामले में उन्हें बहाल कर “जेंडर जस्टिस” की मिसाल पेश की थी.

 

 

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